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नमस्कार दोस्तों ! कैसे हैं आप ? क्या आपको भी ऐसा लगता है कि आपका मन पढ़ाई में नहीं लगता ? आप चांहकर भी पढाई पे concentrate नहीं कर पाते हो ? तो आइये आज हम इसी पर बात करते हैं कि आखिर पढाई में मन क्यों नहीं लग रहा ! किसी ने कहा है कि जैसा हम सोंचते हैं , हमारा शरीर वैसे ही क्रियाऐं करता है। जैसे मान लो आप किसी थियेटर में कोई पिक्चर देख रहे हो यानी इससे पहले आपके दिमाग में पिक्चर देखने का विचार आया होगा ! तभी आप निकले होंगे पिक्चर देखने ! हम पढाई करने नहीं बैठते तो इसका मुख्य कारण यह है कि हमारे दिमाग में पढाई का विचार नहीं चलता ! इसके जगह फालतु के विचार चलता रहता है और इसी में समय ब्यतित हो जाता है। अब वो कारक हमें ढूँढना होगा जो हमारे विचारों को इस प्रकार से प्रभावित करते हैं |
आज हमारे दैनिक समाचार पत्र के साथ-साथ एक सरकारी विज्ञापन का पन्ना भी मिला । जोकि राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम बलिया से संबंधित था । मुझे लगा कि आप लोगों के साथ इसे अपने इस पेज पर साझा करना चाहिए । कुष्ठ रोग क्या है ? • यह एक जीवाणु माइकोबैक्टेरियम लैप्री द्वारा फैलता है । • यह वंशानुगत तथा पिछले जन्म के पापों का प्रतिफल नहीं है । • कुष्ठ रोग 98% संक्रमित रोगियों के खांसने व छींकने से निकलने वाले कीटाणुओं के नए व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करने से फैलता है । • कुष्ठ रोग मात्र 2% संक्रमित रोगी के साथ लंबे समय तक त्वचा के संपर्क एवं संसर्ग में रहने पर फैलता है। कुष्ठ रोग के लक्षण • शरीर पर शरीर के रंग से हल्के रंग , लाल रंग अथवा पूर्ण रूप से सुन कोई दाग धब्बा अथवा चकता पाया जाना। • कोहनी के पीछे अथवा घुटने के पीछे वाली नस का मोटा होना अथवा मोटे होने के साथ-साथ दर्द होना। • हाथों अथवा पैरों की मांसपेशियों में अचानक कमजोरी होना। कुष्ठ रोग का उपचार • कुष्ठ रोग साध्य है , उपचार के बाद पूर्णतया ठीक हो जाता है। अतः कुष्ठ रोग ...
