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Showing posts with the label महापुरूषों की जीवन यात्रा

विनोबा भावे : एक महान दार्शनिक और समाज सुधारक

एक कहावत है “ कुछ महान पैदा होते हैं , कुछ महानता प्राप्त करते हैं और कुछ पर महानता थोपी जाती है।” विनोबा भावे उन महान विभूतियों में से थे जिन्होंने अपने कर्मों से महानता  अर्जित की। वे एक महान दार्शनिक, संत , समाज सुधारक या यूं कहे तो एक युग-निर्माता थे । विनोबा भावे का जन्म 11 सितंबर 1895 को महाराष्ट्र के कोलाबा जिले के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनका वास्तविक नाम विनायक नरहरी भावे था। महात्मा गांधी जी स्नेहवश उन्हें विनोबा पुकारते थे। फिर ये विनोबा भावे नाम से ही विख्यात हुवे।  इनके पिता का नाम नरहरी शंभू राव भावे था और माता का नाम रुकमणी देवी था। महात्मा गांधी जी से भेंट : ऐसा कहा जाता है कि विनायक जी प्रारंभ में हिमालय में जाकर शरण लेकर आध्यात्मिक जीवन जीना चाहते थे , परंतु ऐसा हो नहीं पाया।  विनायक जी , गांधी जी के लेख और भाषण हमेशा पढ़ते रहते थे । उनके अन्तर्मन में कुछ प्रश्न उभर रहे थे जिसे उन्होंने एक पत्र गांधी जी को लिखकर भेजा , जिसका उत्तर भी जल्दी ही आ गया। इसके बाद इनके बीच कई बार पत्राचार हुआ और फिर  दिन महात्मा गांधी जी ने उन्ह...

अब्राहम लिंकन ( Abraham Lincoln ) की जीवन यात्रा

अब्राहम लिंकन संयुक्त राज्य    अमेरिका के सोलहवें राष्ट्रपति थे | ये वकील ,  कुशल विचारक , स्वाध्याय - प्रेमी  और कुशल राजनीतिज्ञ थे | इसके अतिरिक्त में अमेरिका दास प्रथा के अंत का श्रेय अब्राहम लिंकन को ही जाता है |   इनका जन्म संयुक्त राज्य अमेरिका के केंटकी शहर में 12 फरवरी  सन 1809 ई. को  एक बेहद गरीब और अश्वेत परिवार में हुवा था | इनकी शिक्षा दीक्षा का उचित प्रबन्ध नहीं हो सका पर शिक्षा के प्रति इनकी रूचि ऐसी थी कि वे रात को स्ट्रीट लाईट के प्रकाश में पढ़ा करते थे |  अब्राहम लिंकन के विषय में यह कहा जाता है कि वे बीस सालों तक वकालत की पर वे आर्थिक रूप से  सफल वकील नहीं बन पाए , क्योंकि वे अपने मुवक्किलों  बहुत ही कम पैसा फ़ीस के रूप में लेते थे | एक बार उनके एक मुवक्किल ने उन्हें पचीस डॉलर फीस के पैसे  दे रहा था |  तो  उनमें में दस डालर  यह कहकर लौटा दिए की इस केस के लिए पंद्रह डालर ही पर्याप्त हैं |  अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में इनका कार्यकाल 1861 से 1865 तक रह...

भारत के 14 वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

श्री रामनाथ कोविंद ने 25 जुलाई 2017 को भारत के 14 वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। श्री कोविंद एक पिछड़ी जाति से आते हैं। इनका जन्म 1 अक्टूबर सन 1945 ई• को उत्तर प्रदेश के कानपूर के परौंख गांव में हुआ था। इनके पिता का नाम माईकलाल और माता का कलावती देवी है। रामनाथ कोविंद की प्रारम्भिक शिक्षा - दीक्षा प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय में सम्पन्न हुई। इसके बाद D.A.V. College से B.Com. और  D.A.V College Of Law से LLB की पढ़ायी पूरी की। प्रशासनिक क्षेत्र में आकर समाज सेवा करने की इच्छा के कारण ये दिल्ली आ गये और Civil services  की तैयारी में जुट गये और अपने तीसरे प्रयास में सफलता भी प्राप्त कर ली। इनको यह विश्वास था कि इस परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करेंगे। पर ऐसा नहीं हुआ जिसके कारण इन्होनें यह नोकरी ठुकरा दी। कोविंद जी विवाह 30 मई सन 1974 ई• को सविता कोविंद के साथ हुआ। इनके एक पुत्र जिनका नाम प्रशान्त और एक पुत्री जिनका नाम स्वाती हैं। Civil services की नौकरी ठुकराने के बाद  इन्होने दिल्ली हाइकोर्ट में वकालत शुरू की और 16  वर्षों तक अपनी सेवाऐं दी...

भारतेन्दु हरिश्चंद्र की जीवन यात्रा

आधुनिक हिन्दी साहित्य के जन्मदाता भारतेन्दु  हरिश्चंद्र जी का जन्म 9 सितम्बर 1950 ई• को एक समृद्ध परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम गोपालचंद्र गिरिधरदास और माता का नाम पार्वती देवी था। जब ये 5 वर्ष के थे तब इनकी माता का देहान्त हो गया और 10 वर्ष की अवस्था में ही पिता का साया भी सर से उठ गया। पिता की आकस्मिक मृत्यु के पश्चात इनकी शिक्षा-दीक्षा का समुचित प्रबन्ध न हो सका। ये वाराणसी के क्वीन्स कालेज में प्रवेश लिए पर वहाँ इनका मन नहीं लगा।  कालेज छोड़ने के बाद इन्होने स्वाध्याय कर हिन्दी , संस्कृत ,अंग्रेजी के अलावा उर्दू , मराठी , गुजराती , बंगला , पंजाबी आदि भाषाओं का ज्ञान प्राप्त कर लिया। किन्तु हिन्दी के प्रति इनका प्रेम अगाध था। ये हिन्दी साहित्यकारों की सहायता भी करते थे। ये बचपन से ही बड़े उदार स्वभाव के थे। 13 वर्ष की अवस्था में इनका विवाह मन्ना देवी के साथ हुआ। इनके दो पुत्र और एक पुत्री हुयी पर पुत्रों का बाल्यावस्था में ही देहान्त हो गया। पारिवारिक तथा अन्य सांसारिक चिंताओं के कारण इन्हे क्षय - रोग हो गया जिसके कारण 34 वर्ष और 4  महीने की आयु में ही 6 ...

कबीर दास की जीवन यात्रा

कबीर दास भक्तिकाल के उत्तम कवि और सन्त थे। वे हिन्दी साहित्य के निर्गुण धारा के ज्ञानाश्रयी काव्य के प्रवर्तक माने जाते हैं। इनका जन्म सन 1398 ई० में काशी में हुआ था।  इनके जन्म के विषय में यह कहा जाता है कि इनका जन्म स्वामी रामानन्द के आशीर्वाद से एक विधवा ब्राह्मणी के गर्भ से हुआ था जो लोक-लाज के डर से इन्हें एक तालाब के पास फेंक आई। संयोगवश एक जुलाहा दम्पति को ये मिले और उन्होंने ही इनका पालन-पोषण  आदि किया। कबीर दास जी की शिक्षा का उचित ढ़ंग से  न हो सकी। ये  कपड़े बुनने के काम में लग गये और जीविकोपार्जन के लिए कबीर जुलाहे का काम करने लगे। इसके साथ ही साथ साधु संगति और ईश्वर भजन चिंतन में भी लगे रहते थे। इनका विवाह 'लोयी' नाम के  स्त्री से हुआ था।  कबीर के गुरु के सम्बन्ध में यह कहा जाता  है कि कबीर को अच्छे गुरु की तलाश थी। वह वैष्णव संत आचार्य रामानंद को अपना अपना गुरु बनाना चाहते थे लेकिन उन्होंने कबीर को शिष्य बनाने से मना कर दिया लेकिन कबीर ने अपने मन में ठान लिया कि स्वामी रामानंद को ही हर कीमत पर अपना गुरु बनाऊंगा । इसके लिए कबीर ...