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पादपश्चिमोत्तासन की विधि व उससे लाभ

नमस्कार दोस्तों !! पादपश्चिमोत्तासन करने में थोड़ा कठिन जरूर होता है पर बड़ा ही लाभकारी आसन ये | पादपश्चिमोत्तासन  को उग्रासन  भी  कहा जाता है इसलिए  इसके नाम को लेकर आप confuse  मत होईयेगा | शुरुवात में यह आसन पूर्ण रूप से नहीं हो पता क्योंकि इसे करने में तकलीफ होती है पर घबराने की कोई बात नहीं धीरे धीरे अभ्यस्थ होने पर यह आसन बिल्कुल आसान  है | तो आइये जानते हैं इसे कैसे किया जाता है |

                                                   #  पादपश्चिमोत्तासन को करने की विधि  #


१.  सबसे पहले सामान्य श्वांस लेते  हुवे एक स्वच्छ आसान पर दोनों पैरों को सीधा फैला कर  जाएँ |
२.  अब दोनों पैरों के एड़ी और पंजों  परस्पर मिलाएँ तथा घुटनों को ज़मीन  से लगाए |
३.  अब श्वांस छोड़ते हुवे  दोनों पैरों के  अंगूठों को आगे झुक कर दोनों हांथो की तर्जनी और अंगूठों से पकड़े | ध्यान रहे घुटने ज़मीन  से सटे रहें |
इसी  अवस्था में थोड़ी देर तक रहें  धीरे धीरे सामान्य अवस्था में आ जायें |




   #  पादपश्चिमोत्तासन को करने से होने वाले फायदे  #


१.  यह आसन शारीरिक दुर्बलताओं को दूर करने वाला आसन है | 
 २.  इस आसन से नाड़ीयों की शुद्धि होकर हमारी कार्यक्षमता बढ़ती है  | 
३.  इस  आसन से  शरीर का कद लम्बा होता है |  यदि शरीर में चर्बी है तो  वह ख़त्म होती है  और यदि दुबलापन है तो वह दूर होकर शरीर सुडौल , तंदरुस्त  है | यह आसन मोटापन और दुबलापन दोनों को दूर करने में सहायक है | 
४.  इस आसन को करने से बदहज़मी , कब्ज़आदि  जैसी  पेट की समस्याएं , सर्दी - जुखाम , कफ गिरना , कमर का दर्द , हिचकी , पेशाब से सम्बंधित समस्याएं , स्वप्नदोष , वीर्य-विकार , पाण्डुरोग आदि विभिन्न समस्याओं से निजात मिलती है | 



( निवेदन ; प्रिय मित्रों !! योग  फायदेमंद  तो  होता ही है पर इसे उचित ढंग से न किया जाये तो  नुकसान भी पंहुचा सकता है | योग हमारे शरीर और मन का विकाश करता है | इसके अनेक शारीरिक और मानसिक लाभ हैं परन्तु इसका उपयोग किसी दवा की जगह /दवा के विकल्प  रूप में  नहीं किया जाना चाहिए | इसलिए इसे  किसी योग प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में करें  ज्यादा उत्तम होगा |  
हाँ एक बात और  !यदि यह  जानकारी आपको अच्छी लगी तो इसे आप शेयर जरूर करें ताकि दूसरों को भी इसा लाभ मिले | )

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