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गाँधी जी के 10 अनमोल वचन



नमस्कार दोस्तों !!
मोहनदास करमचंद गाँधी जिन्हें पूरी दुनिया महात्मा गाँधी के नाम से जानती है। वे न सिर्फ  हम भारतीयों के प्रेरणास्रोत हैं बल्कि दुनिया के तमाम देशों ने इन्हें पूरी दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत बताया है।
2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर जिले में जन्में मोहनदास ने दुनिया को अहिंसा और सत्य का मार्ग दिखलाया।
हमारे पूर्वजों को 200 सालों से अधिक समय तक अंग्रेजी गुलामी क्यों झेलनी पड़ी ? क्यों ?
क्योंकि अलग-अलग विचारधाराओं का टकराव था ! शक्तियां बिखरी हुयीं थी। गाँधी जी अहिंसा के रूप में जो शस्त्र लाऐ वह आजादी की लड़ायी में सबसे कारगार साबित हुआ। गाँधी जी के आने से बिखरी हुयी शक्तियां इक्टठी हुयीं जिसने अंग्रेजों को भागने को मजबूर कर दिया।
इनकी जीवन शैली एक संत की तरह थी। इसी कारण गुरूदेव रविन्द्र नाथ टैगोर ने गाँधी जी को महात्मा क उपाधी दी। तभी से इन्हें महात्मा गाँधी पुकारा जाने लगा।
महात्मा गाँधी शरीर से भले ही कमजोर थे पर मन से इतने मजबूत थे कि जो ठान लेते थे , वो करते ही थे ।
30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे नाम के व्यक्ति ने उनकी गोली  मारकर हत्या कर दी।
दोस्तो ! महात्मा गाँधी जी भले ही हमारे बीच न हों लेकिन उनके विचारों ! उनके अच्छे कर्मों के कारण हम उन्हें आज भी याद करते हैं।
यहाँ पर हम उनके कुछ उन अनमोल विचारों को आपके सामने रख रहे हैं जो उन्होनें विभिन्न सभाओं में कही …………


1•   तुम मुझे जंजीरों से बाँधों या मेरे साथ अत्याचार करो या मेरे पूरे शरीर को नष्ट कर दो , फिर तुम मेरे मन को कैद नहीं कर सकते । "

2•    " अहिंसा मानवता के लिए सबसे बड़ी ताकत है । यह आदमी द्वारा तैयार किये गये विनाश के ताकतवर हथियारों से कहीं अधिक शक्तिशाली है। "

3•   "  मनुष्य अपने विचारों से निर्मित होता है। जैसा वह सोचता है वैसा ही बन जाता है। "

4•   "  पाप से घृणा करो पापी से प्रेम करो ।  "

5•   "  मौन सबसे सशक्त भाषण हैं ! धीरे - धीरे दुनिया आपको सुनेगी। "

6•    "  महिला का वास्तविक आभूषण उसका चरित्र और उसकी पवित्रता है। "

7•    आँख के बदले आँख , पूरी दुनिया को अँधा बना देती है। "

8•    व्यक्ति की पहचान उसके कपड़ों से नहीं उसके उसके चरित्र से आंकी जाती है। "

 9•   "  पहले वो आप पर ध्यान नहीं देंगे ,  फिर वो आप पर हँसेंगे फिर वो आपसे लड़ेंगे और तब आप जीत जाऐंगे। "

10•   "  आजादी का कोई मतलब नहीं , यदि इसमें गलती करने की आजादी शामिल न हो ।  " 

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