Skip to main content

सोडियम को किरोसिन तेल में क्यों रखा जाता है

क्या आप जानते हैं सोडियम को केरोसिन तेल में क्यों रखा जाता है ? यदि आप विज्ञान के छात्र हो तो हो सकता है आपको पता हो। यदि नहीं पता तो आइए इस पर बात करते हैं .....


सोडियम अत्यधिक क्रियाशील धातु है । यह हवा या पानी के साथ तीव्र गति से अभिक्रिया करता है।
सोडियम ऑक्सीजन से अभिक्रिया कर सोडियम पराक्साइड बना लेता है और जल से अभिक्रिया कर सोडियम हाइड्रोक्साइड बनाता है। यह एक exothermic reaction यानी उष्माक्षेपी अभिक्रिया होती है जिसमें ऊष्मा बाहर निकलती है।

केरोसिन एक कार्बनिक तेल है जिसमें सोडियम को रखने पर सोडियम उसके तत्वों के साथ रिएक्शन नहीं करता है।
केरोसिन के अलावा आदर्श गैसों यानी अक्रिय गैसों के साथ भी रखा जा सकता है। लेकिन आदर्श गैसों के कम उपलब्धता के कारण सोडियम को केरोसिन तेल में रखा जाता है।

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

एमडीटी खाओ - कुष्ठ भगाओ

आज हमारे दैनिक समाचार पत्र के साथ-साथ एक सरकारी विज्ञापन का पन्ना भी मिला । जोकि राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम बलिया से संबंधित था । मुझे लगा कि आप लोगों के साथ इसे अपने इस पेज पर साझा करना चाहिए । कुष्ठ रोग क्या है ? • यह एक जीवाणु माइकोबैक्टेरियम लैप्री द्वारा फैलता है । • यह वंशानुगत तथा पिछले जन्म के पापों का प्रतिफल नहीं है । • कुष्ठ रोग 98% संक्रमित रोगियों के खांसने व छींकने से निकलने वाले कीटाणुओं के नए व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करने से फैलता है । • कुष्ठ रोग मात्र 2% संक्रमित रोगी के साथ लंबे समय तक त्वचा के संपर्क एवं संसर्ग में रहने पर फैलता है। कुष्ठ रोग के लक्षण •  शरीर पर शरीर के रंग से हल्के रंग , लाल रंग अथवा पूर्ण रूप से सुन कोई दाग धब्बा अथवा चकता पाया जाना। •  कोहनी के पीछे अथवा घुटने के पीछे वाली नस का मोटा होना अथवा मोटे होने के साथ-साथ दर्द होना। • हाथों अथवा पैरों की मांसपेशियों में अचानक कमजोरी होना। कुष्ठ रोग का उपचार • कुष्ठ रोग साध्य है , उपचार के बाद पूर्णतया ठीक हो जाता है। अतः कुष्ठ रोग ...

जेट-प्रवाह ( Jet Streams ) क्या है

जेट-प्रवाह अथवा जेट धारायें  का अंग्रेजी रूपान्तरण जेट स्ट्रीम ( Jet Streams )   कहलाता हैं। मुख्य रूप से  क्षोभमण्डल ( Troposphere ) के ऊपरी परत यानि समतापमण्डल ( Stratosphere ) में बहुत ही तीब्र गति से चलने  वाली नलिकाकार, संकरी पवन- प्रवाह अथवा वायु  प्रणाली को जेट-प्रवाह कहते हैं। चूकि विमानों के उड़ान में यह मण्डल सहायक होता  है , इसलिए इसका नाम Jet Streams  दिया गया है |    ➽     ये जेट-प्रवाह चक्रवातों ( Cyclones )  ,  प्रतिचक्रवातों ( Anticyclones ) , तुफानों ( Storms ) , वायुमण्डलीय विक्षोभों ( Atmospheric disturbances )  और वर्षा उत्पन करने में सहायक होती हैं। यानि ये हवायें धरातलीय मौसम को प्रभावित करती हैं |    ➽     ये हवायें सामान्यतः  पश्चिम से पूरब की ओर प्रवाहित होती हैं और यह  ऊपरी वायुमंडल में ये  7  से 12 किमी की ऊच्चाई पर होती हैं। ( नोट - अलग अलग किताबों में यह डाटा अलग अलग दिया गया है | )   ...

ये हैं G8 के सदस्य देश

G8  के सदस्य देशों को इस ट्रिक के माध्यम से याद कर सकते हे। " जीजा कई बार फ्रांस आए " जी ( जर्मनी) जा ( जापान ) क ( कनाडा ) ई ( इटली ) बा (ब्रिटेन ) र ( रूस ) फ्रांस और आऐ से आस्ट्रैलिया