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इसरो के मुख्य प्रक्षेपण यान ( launch vehicle of ISRO )

Launch vehicle यानी प्रक्षेपण यान, उपग्रहों को अंतरिक्ष की विभिन्न कक्षा तक पहुंचाने का कार्य करते हैं ।अंतरिक्ष कार्यक्रमों के विकास में ISRO ने कुछ महत्वपूर्ण प्रक्षेपण यान विकसित किया है।

इसरो ने आरंभिक दौर में स्वदेशी तकनीक से दो प्रक्षेपण यान का निर्माण किया  था , जो अब धरोहर प्रक्षेपण यान के रूप में जाने जाते हैं।

SLV ( SATELLITE LAUNCH VEHICLE )


 SLV-3 भारत का पहला प्रयोगिक उपग्रह प्रक्षेपण यान था। 18 जुलाई 1980 को SLV-3 के सफल परीक्षण के साथ भारत ने प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कदम रखा। अमेरिका ,चीन ,रूस , फ्रांस तथा जापान के बाद भारत भी अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया है।
SLV-3 यान , 17 टन भारी तथा 22 मीटर ऊंचा प्रक्षेपण यान था । ठोस ईंधन के साथ चार चरणों में यह  40 किलोग्राम भार के उपग्रह को पृथ्वी की निम्न कक्षा में स्थापित करने में सक्षम था।

ASLV ( Augmented satellite launch vehicle )


इसे हिंदी में संवर्धित उपग्रह प्रक्षेपण यान कहा जाता है। इस प्रक्षेपण यान को निम्न कक्षाओं के लिए  150 किलोग्राम भार हेतु निर्मित किया गया था।
ASLV कार्यक्रम के अंतर्गत चार विकासात्मक उड़ाने संपन्न कराई गई थी।

PSLV ( POLAR SATELLITE LAUNCH VEHICLE )


PSLV को हिंदी में ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान कहते हैं। इस प्रक्षेपण यान को विश्व का सर्वाधिक भरोसेमंद प्रक्षेपण यान माना जाता है।
यह अक्टूबर 1994 में लांच हुआ तथा विगत वर्षों से ये इसरो की सेवा में है।
PSLV 1400 किलोग्राम वजन तक के उपग्रह को , 800 किलो मीटर ऊंची ध्रुवीय कक्षा में स्थापित कर सकता है।
इसके माध्यम से अब तक 43 प्रक्षेपण किए जा चुके हैं।

GSLV ( GEOSTATIONARY SATELLITE LAUNCH VEHICLE )


GSLV को हिंदी में भू तुल्यकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान कहा जाता है। इस प्रक्षेपण यान को मूल रुप से इनसेट श्रेणी के उपग्रहों को भू तुल्यकालिक अंतरण कक्षा में प्रस्थापित करने के लिए विकसित किया गया था।
वर्तमान में जीएसएलवी को जीसैट श्रृंखला के उपग्रह को प्रक्षेपित करने के लिए प्रयुक्त किया जा रहा है।
GSLV तीन चरणों वाला प्रक्षेपण यान है। इसके द्वारा संचार उपग्रहों को प्रक्षेपित किया गया है।

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