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किसी काम में आपका मन नहीं लग रहा ? तो यह पढ़ें

आप भी यह महसूस करते होंगे कि हमारा शरीर चाहें कितना भी दुबला-पतला क्यों न हो , यदि हमारे अंदर इच्छाशक्ति है तो हम किसी भी कठिन से कठिन कार्य को जो भले ही अकल्पनीय लगता हो , हम कर सकते हैं। महात्मा गांधी , विनोबा भावे , एपीजे अब्दुल कलाम ये कुछ ऐसे तमाम उदाहरण है जिन्होंने अपने इच्छाशक्ति के बल पर ही महान कार्यों को सम्पन्न किया है ।
किसी व्यक्ति का किसी कार्य में मन नहीं लग रहा है तो इसके पीछे केवल दो ही कारण हो सकते हैं पहला शारीरिक और दूसरा मानसिक।
स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का वास होता है यह कोई कहानी नहीं है इस बात को हम लोग अपने दैनिक जीवन में हमेशा महसूस भी करते हैं। यदि शरीर अस्वस्थ है तो वाकई हमारा किसी कार्य में मन लग ही नहीं सकता। इसलिए सबसे पहले अपने शरीर को पूर्ण रूप से स्वस्थ रखने का प्रयास हमेशा करना पड़ेगा। यह शरीर चाहें दुबला पतला क्यों न हो , स्वस्थ होना चाहिए , निरोगी होना चाहिए।

किसी कार्य में मन न लगने का दूसरा कारण होता है मानसिक। यदि शरीर पूर्ण रूप से स्वस्थ है फिर भी यदि किसी कार्य में हमारा मन नहीं लग रहा है तो समझ जाइए इसके पीछे मानसिक कारण ही है , इसे आप मनोवैज्ञानिक कारण भी कह सकते हैं। ई कवनो बीमारी नहीं है घबराने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं है। जरूरत है केवल “ जरूरत ” की । जी हां हमारी जरूरत ही हमको कार्य करने के लिए प्रेरित करती है। यह हमारी शारीरिक प्रकृति का नियम है।

हमारी जरूरत का सीधा संबंध हमारी इच्छा से होता है और हमारी इच्छा की प्राप्ति तभी होगी जब उसको पाने की हमारे अंदर इच्छा शक्ति होगी। इच्छा शक्ति का विकास अपने अंदर हम विचारों के माध्यम से कर सकते हैं। यदि आप छात्र हैं और आप का मन पढ़ने में नहीं लग रहा तो यह आपको विचार करना पड़ेगा कि पढ़ाई आप के लिए क्यों जरूरी है ? यदि आप अभी पढ लेते हैं तो आपका भविष्य कैसा होगा ? यह भी आपको विचार करना होगा। अपने अंदर इच्छाशक्ति को विकसित करने का यही सर्वोत्तम तरीका है।

कहते हैं इच्छाशक्ति वह अस्त्र है जो मन को दृढ़ तो रखती ही है , मन को प्रसन्न और हमेशा व्यक्ति को सफलता की ओर ले जाती है। इसके कारण ही हम अपने दिल और दिमाग से कार्य में जुट जाते हैं , इसके कारण ही मेहनत की खुरदरे राहों  पर चलना आसान हो जाता है।

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